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एक क्लास

नींद नही आती आज कल आखो मे जो धुआ था आज बर्फिली धुप बन गया इतना प्यारा नगमा है की ये पलके भी मिटती नही आज कल ऐसा लगता है जजिरा मिल गया जहा जुगनु की रंगीन ‘रोशनी’ से ‘सृष्टी’ झुम जाती हो जहा हरियाली इतनी सजी हो की लगे ‘पूजा’-पाठ कर रही है दिगंत पर जहा ‘शुभांगी’सी हसीन शजर अपनी खुशबू को ‘मल्लिका’ के गंधसी गुजरते पलों मे मिला ती हो जहा चांद का जमाल भी ऐसा उतरता हो जमिन पर जैसे ‘अरुषी’ आती है सुरज से जहा ‘निशी’ के साथ बेखौफ हो रंजनीगंधा जो जिवित है ‘आयुशी’ की तरहा, बेहती है कस्तुरीसी जहा हो ओस की ‘मिहिका’, झरने की जीवीका जहा हो आशियाना ‘अनिकेत’ की शाश्वती से भरा जहा दवाग्नी भी ‘प्रार्थना’ करता हो मेघाओं के राजा ‘मेघन’ से जिसकी ‘आस्था’ ‘राघव’ के जिवनसी पवित्र है जहा सबको हो स्मरण खुद के ऐहसास का जिसे ‘सिमरन’ कहते है जहा हो ‘अभिरुची’ शांती की, ईच्छा ‘मनिष’ की, सुंदरता ‘प्रियांका’ की जहा हो ‘मेहेक’ खेतों मे खिले पिले सोने की, शहदसी मधुरता हो ‘मधुनिका’ की जहा हो तेज ‘आदित्य’ का, मन ‘मानसी’ का, सुर ‘सानिका’ का जहा हो 'कबीर'सा कोई संत जिसका ना हो कोई ईमान, जिसक...

पानी

पानी, हा मेरे प्यारे दोस्तो वही पानी जिसे तेलुगू में नीरु, कन्नड में नीर, संस्कृत में वारी, उर्दू में आब तमिल में तनीं और हिंदी में पानी कहते जिसमे लाल मिलाये तो खून बनता है नमकीन मिलाये तो आसू बनता है जो आसमान में बनता है पहाडोसे गुजरते नदीओ से बेहता है जो आपके जिस्म में समाता है हा वही पानी जो आपकी मेरी मेहबुबा के बालो में छुप जाता हैं रोम रोम में खो जाता हैं वही पानी जिससे आग बुजाने पर भाप बनती है प्यास बुजाने पर धडकने बन जाती है ओ पानी आजकल बोतलो में आता हैं कुछ अलगसा है ये पांनी RO, VO, XO, JIO से purify हुआ आपके आसुओ से भी सस्ता अब्र के बुंदोसे भी स्वच पानी इस पानी का इक हिस्सा देगा आपके बच्चो को शिक्षा तो आओ खरीदो ये पानी high definition वाला पानी... आपके आसुओ से भी सस्ता अब्र के बुंदोसे भी स्वच पानी

मै और मेरी माशुका

मैने मेरी माशुका से कहा की - चेहरे की नुमाइंदगी करता ओस का बुलबुला बन जाऊ मै चेहरे की मासुमियत छुती बारिश  की  बुंद बन जाऊ पर मेरी माशुका इतनी नफरत करती है की उसने कहा- तू बन जा ओस का बुलबुला, मै सुबह की धूप बन जाऊ बारिश की बुंद बन जा, मै जलती आग बन जाऊ फिरभी प्यारभरे लब्जोसे  मैने कहा- पलकों को अपनी नर्म बाहो में समेटती शाम बन जाऊ मै इन आँखो की मेहेरबानी लेने रंगीन तितली बन जाऊ उसने फौरन कहा- बन जा तू शाम नर्म बाहो की, मैं थंडी रात बन जाऊ तितली बन जा तू रंगीन, मैं नरभक्षी फुल बन जाऊ मैं बेहाल, मैने कहा- बालों को अपने कंधोपर लहरता हवा का झोका बन जाऊ भौह की अदाओ को समाने मैं तेरा माथा बन जाऊ उसने अपने बालों को सवरते हुए कहा- तू बन जा हवा का झोका, मैं उसे चिरता पहाड बन जाऊ बन जा मेरा माथा, फिर मैं बदसुरत बन जाऊ थोडी उदासी से मैने कहा- तु पास होने का एहसास, तेरी तस्वीर बन जाऊ तु छुने की निशाणी, मै जमीन की मिट्टी बन जाऊ हसते हुए उसने जवाब दिया- तस्वीर बन जा तू, मैं अदृश्य, देहहीन बन जाऊ तू जमीन क...

मैं 'तू' बन जाऊ....

चेहरे की नुमाइंदगी करता ओस का बुलबुला बन जाऊ मै चेहरे की मासुमियत छुती बारिश  की  बुंद बन जाऊ पलकों को अपनी गर्म बाहो में समेटती शाम बन जाऊ मै इन आँखो की मेहेरबानी लेने रंगीन तितली बन जाऊ बालों को अपने कंधोपर लहरता हवा का झोका बन जाऊ भौह की अदाओ को समाने मैं तेरा माथा बन जाऊ तु पास होने का एहसास दिलाती तस्वीर बन जाऊ तु छुने की निशाणी, मै जमीन की मिट्टी बन जाऊ होली में तेरे गालो पर खिलता कोई रंग बन जाऊ मै तूने दिवाली में लगाया जलता दिया बन जाऊ तेरी आवाज को सुनेने मै सुमसान जंगल बन जाऊ तेरी धुंध में नाचणे मैं भी नाचती रागिणी बन जाऊ जहा तेरा आना जाना है उस गली का मैं पत्थर बन जाऊ तुजपर नजर रखे रात का चांद, दिन का सुरज बन जाऊ तू जब आये किनारे पे, तेरी ओर खिचती लहरे बन जाऊ तू भिग जाये बारिश में, में काले बादल बन जाऊ तू चले तो मैं चाल बन जाऊ तू रुके तो रुकावट बन जाऊ चीड जाये तो घुस्सा बन जाऊ तेरी हसी की मैं मुस्कान बन जाऊ तेरी जख्म का मैं मरहम बन जाऊ तेरे अश्कों का खारापन बन जाऊ तू है ओ जहा...

पिछले कुछ सात दिन

सात दिन का ये अंधेरा इतना गहरा था कि सदियों से सुरज छुपा हो बादलों के पिछे दिल पे धूल जमी थी तेरी आखों की रोशनी ने दिल फिर से साफ कर दिया तेरी आंखे ऐसी कि मानो कली ने घुंघट को हलकेसे ओढ लिया हो जब बंद होती है तो फुल पर खिले तितली कि तरहा मासूम   और खुलं जाये तो रंगो के खुशबूदार झरणे की तरहा शादाब जिसमे बह जाये कोई भी इन्ह बालो का आखो पर झुमना हवा के साथ लढना, खेलना हसना इन्ह अदाओ का कुछ हिस्सा सुबह ने दिगंत पर रखा है जहा आकाश भी नही जा सकता पिछले कुछ सात दिनो में सब रुक गया था  अब जिंदगी का एहसास हो रहा  है तेरा सामने होना दुरी के गमसे, मेरी तन्हाई के दर्दसे कहीं गुणा हसीन खूबसूरत है.. पर जाना है तुझे भी, मुझे भी वक्त की नजाकत पर चूप रहना ही ठीक होगा      

तुम इंसान बना दो

याद किया कई बार दिल ने दिल को टुटा तारा दिला दो तुम दिखाई दो कही यहा अब शिशे को ऐसी रोशनी ला दो तुम्हारा नशा इतना चढ गया दिन मे चांद ढुंढने लग गये वक्त सिधा चल रहा है अभी उसेभी थोडी शराब पिला दो नफरत भरी निगाहो से देखा फिरभी नफरत नही कर पाये बैर रखे जमिन भी मिट्टी से हमे नफरत की ऐसी दवा दो तुम छुओ पत्थर धडक जाये होश हमने खोया है कब से फुरसत मिले कभी तुमे तो हमेभी फिरसे इंसान बना दो सामने आना, फिर चले जाना इन्हसे भी सुकुन मिलता है अब कभी आओगे सामने तो सासो मे जरासा दर्द मिला दो

खामोशिया

वक्त खामोश है, इस रात से अलग होकर जिसने चांद की चाह में गगन का रूप लिया है उस दिल की तरहा, सदिओ पुरानी है ये चाहत और  सदिओ से चलती आ रही है ये अमावस  शांत हो गयी है अब दोनो की धडकने, बादल भी थम गये है कही, जिसपर हवा का आना-जाना था ओ चंचल लहरे भी रुक गयी,   आकाश में चमकती तितलियों ने भी अब पलके मिटा दी  दर्द की दर्दभरी दास्तान ले कर जी रहे वक्त से मैं क्या बोलूं? कैसे कहू, क्यू खामोश है तू भी? उसने भी सजाई है मेहफिले हजारो, उसने भी हर कब्र पर  है आसू बहाये  मेरी खामोशिया तो  उन्ह लब्जो की नाराजगी है जिने कोई सुनता नही, मेरी खामोशिया उन्ह आसुओ कि रुसवाई है  जिनको कोई देखता नही, तू भी नही     मैं तो कहा देखा है  वक्त के अश्को को,   वक्त के अल्फाज को सुनेने की कोशिश भी नही की कभी  शायद वक्त मायूस है मेरे से,  मेरी तरहा पर दोनो का साथ चलाना अनिवार्य है वक्त भी चल रहा है और मैं भी, अब तू भी चल दो कदम मेरे साथ..  तेरे साथ में खामोशिया खामोश हो...