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ये दिल्ली काश तू इंसान होती..

ये दिल्ली काश तू इंसान होती तुझमे भी बाईं तरफ दिल होता मुम्बई, हैदराबाद, बैंगलोर से या फिर श्रीनगर, इस्लामाबाद या लाहोर से तुझे भी प्यार हो जाता ये दिल्ली काश तू इंसान होती तुझमे भी बाईं तरफ दिल होता ये दिल्ली काश तू इंसान होती किसी बच्चे की तू मा होती फिर ‘इंच इंच’ के लिये तू युह ना लढती खुद का बच्चा भुका रखकर तू तू दुसरों के बच्चे युह ना मार देती ये दिल्ली काश तू इंसान होती तुझमे भी बाईं तरफ दिल होता ये दिल्ली काश तू इंसान होती दुनिया देखने के लिये दो आखे होती जिन्हो ने आपने खोए है किसी दंगे मे उन्हके आसू देख पाती सिर्फ मुआविज़ा देकर पराया ना करती ये दिल्ली काश तू इंसान होती तुझमे भी बाईं तरफ दिल होता ये दिल्ली काश तू इंसान होती हर चुनाव मे हात की किसी उंगली पर काली स्याही लगवाने का दर्द समझ पाती तू मेरी भी तकलीफ समझ पाती ये दिल्ली काश तू इंसान होती तुझमे भी बाईं तरफ दिल होता Incomplete...

India-भारत

कुछ मकान आसमान को छू लेते है कुछ लोग आसमान को ही छत बनाते है खुलती है Starbuks, CCD की दुकाने कदम कदम पर अस्पताल से दूर हर दिन कुछ लोग मर जाते है कुछ लोग hair oil मे protein ढुंढते है यहा कुछ बच्चे protein के बिना ही जी लेते है Front page पर छपती है खबरे Indian Premier League की अफबारवाले भारतीय किसान मोर्चे की black and white तस्वीरे आखरी पन्ने पर चिपकाते है India की अमीरी मे लोग खाने का शौक रखते है भारत की गरीबी मे लोग भूखे सो जाते है

आजतक

आजतक कभी आसमान मे टुटता तारा नही देखा मैंने उसकी आखो मे काजल फैलते हुए देखा... मैंने उसकी आखे देखकर मन्नते मांगी है आजतक कभी मैंने पुनम का चांद नही देखा मैंने उसके माथेपर बिंदी को चमते हुए देखा मैंने उसकी बिंदी देखकर गझल लिखी है आजतक कभी लावा बहते हुए नही देखा मैंने उसके गालोंपर गुलाब खिलते हुए देखा उस गुलाबी रंग ने मेरी ज़िंदगी सजाई है आजतक कभी हवॉ मे सासों को तैरते हुए नही देखा मैंने उसकी आवाज को मुझे छुकर जाते हुए देखा मैंने उसकी आवाज सुनते सुनते ज़िंदगी गुजारी है

कुछ चीखे

आज कल कुछ चीखे मुझे सोने नही देती सपनों मे आकर उन्हका हक्क मांगती कुछ चीखे मुझे सोने नही देती मै उठ जाता हु घर से बाहर निकलता हु बाहर भीड की आवाजे मुझे जीने नही देती आज कल कुछ चीखे मुझे सोने नही देती बहन की बेटी के लिये मैंने खिलोना खरीदा था आज उसकी खामोशी मुझे बोलने नही देती आज कल कुछ चीखे मुझे सोने नही देती मुझे पता नही क्या होगा लेकीन इतना बता दू जो कुछ शेष बचेगा मुझे ढंग से मरने नही देगा... जो कुछ शेष बचेगा मुझे ढंग से मरने नही देगा...

Unknown...

दुर रहकर भी ऑखो मे बस जाता है उसका चेहरा आसमान बन जाता है ओ बाते बिना सोचे समझे करती है उसे क्या पता ‘ये’ सासे ‘उन्ह’ बातोंपर चलती है ओ ढूंढ रही है मृगतृष्णा रेगिस्तान मे और यहा मेरी आखे दरीया बन जाती है दिया जलाने का बहुत शौक था मगर उसका साथ हो तो यहा रात दिखती नही है अब ओ नही है यहा मिट्टी बार बार बता रही है फिर भी न जाने क्यु हवा खाक छान रही है

.... तो जान जाएगी

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ये शाम तुझे भी इजाजत मिल जाएगी किसी शाम तुझे भी मोहब्बत मिल जाएगी एक सास मे इतना नजदीक आया हु की दुर जाते जाते पुरी जिंदगी गुजर जाएगी नये शहर गये हो तुम चांद चमक गया होगा अब पुरानी बस्ती अंधेरे मे बिखर जाएगी पलकों का ये खेल नब्जों से मिलता है नजर झुक जायेगी तो धडकन रुक जाएगी मिट्टी ने कहा था मुझसे इश्क जालिम होता है मुझे क्या पता हकीकत अश्को मे भिग जाएगी सो रहा था मै जब खुदा आया था दर पर मेहफिल से तुम चले जाओगे तो जान जाएगी

It's not good bye.. It's see you later..

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तुम सब एक अनमोल कहानी साथ लेकर जा रहे हो जिसमे है आमोद, आनंद उत्कर्ष और पुल्किता जिसमे है शाम सी अरुनिमा जो साथ रहेगी उम्रभर जैसे साथ रहता है आयुष तुम सब एक अनमोल कहानी साथ लेकर जा रहे हो एक कहानी अफ्ताब सी ओजस्वी नम्रता सी नम्र मृणालसी शांत भवानी, रेवा, भाव्या और आर्या सी रौद्र हिमाद्री सी शीतल सुशांत सी विचारशील अर्चाना सी एकाग्र सोने से भी उज्वल रेश्मा शी रेशमी तुम सब एक ऐसी कहानी साथ लेकर जा रहे हो एक ऐसी कहानी जिसमे मीरा का प्यार हो हरी का विश्वरूप हो ऋत्विक सा ध्यान हो सिम्रन का चिंतन हो लक्ष्मी का प्रतिक हो श्रीपर्ना की उज्वलता हो श्रेया का दिप हो अंजली सा आदर हो दिव्या की दिव्यता हो... जो जस्मिन की खुशबू से पारुल की खुबसुरती से सुरभी की महक से मीनाक्षी की सुंदरता से तन्वी की मासुमियत से सोफिया की नजाकत से एकरूप हो गयी हो एक ऐसी कहानी तुम सब लेकर जा रहे हो इस कहानी की कोई एक भाषा नही है इसमे समाये है हजारो लब्ज तपाब्रता, देबारती से लेकर प्रिस्कीला, श्रीकुट्टी तक हर लब्ज इस मे बसा है... हजारो भाव है फिर भी एक साथ रहने की मान...