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अस्तित्व

अस्तित्व एक विराण वास्तु बनलय तिला प्रत्येक किरणांना रोखणार्‍या खदकांनी वेढा घातलाय... पहार्‍याची गरजच नाही इथे सजीवतेचा अंशच नाही आहे तो फक्त पुर्वजांचा बेनाम वावर ह्या वास्तुला भय नाही सुरकुत्यांचभेगांच भीती तर त्या काळ्याकोठडीतल्या काळकिड्यांची वाटतेय एकटेपणावर टोच्या मारणार्‍या जिथे नगाडे वाजायचे तिथे किरकिरतेय रात्र दिवसाही दिपस्तंभाची जागा आता तिमिराच्या वटवाघळांनी घेतलीय काजवांनाही आहे शाप त्याचा ह्या वास्तवाच्याकाळाशार रंगमंचावर अभिनय करता करता रंगीत स्वप्न बघण विसरलोय आता ही वास्तु सोड्ण्याशिवाय पर्यायच नाही ....

गरीबी

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अब गरीबी इनका भी मनोरंजन करेगी भुके नंगे बच्चे भी नाचेंगे आसुभी मिठे होंगे गुमशुदा खामोशीभी चिल्लायेगी गाणे झुठे चलो गरीबी का मार्केटिंग करे नये गरीब बनाये पुराने गरीब खरिदे चलो गरीबी को ग्लोबलायज् करे झोपडपट्टी को टुरिस्ट पोईंट बनाये गोरे लोगों के लिये गरीबी का अ‍ॅप बनाये गरीबी को मोडर्न करे गरीबी को अड्व्हॉस करे गरीबी और गरीब दोनो बढाये उच्छाटन ना करे नही तो फिर अमीरों के लिये गुलाम कौन बने?

तेरेबिना

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तेरे बिना जिंदगी एक मौत खौफनाक मुझे तो बनना है तेरी हर एक अदा का पर मुझे गिला है अफ्ताब के, चॉद के, मेरे बेबस होने पर तेरी यादोंने लिखा है तेरा नाम मेरे अश्कों के, दुऑओ के मेरे इब्तिदा के घर पर तेरी हर मिनट की आखरी सास अगली मिनट की पहली सास अब यही तो है मेरी आरजु मेरी आस क्योकी तेरेबिना जिंदगी एक मौत खौफनाक तेरेबिना डर लगता है     इन्ह शेरो-शायरी का लब्जों के परायेपन का पर आजकल बादलों को भी खबर नही बारिश की और मुझेभी नही देनी खबर मेरे महोब्बत की तेरा होनाही है जन्नत का सफर तुझे देखनाही है खुदा का मिलन तु है तो रातभी लगती है रोशनी के बाग की चमकती कली तु नही तो ये दिनभी लगता है मुर्झे हुये बुंदों की बद्सुरत नदी.. क्योकी तेरेबिना जिंदगी एक मौत खौफनाक इस मौत को भी होता है साया और मै आशिक अकेला... तो आ जल्दी और बन जा मेरा भी साया…

माफीनामा

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गज़लों की कायनात तो बना नही सकता, मजबूर हु चंद लम्हों का माफीनामा लिख सकता हु नुर-ए-खुदा के कदमों पे कातिल जो हु हर लब्जों का अंजान अंजुमन मे अजनबी अकेलेपन के आसु आतेही है ना गिरते हुऐ बुंदे गलती करतेही है ना उस गिरते हुऐ बुंदों की ओर से मै मांगता हु माफी, उस अकेलेपन से परेशान, खुद की ओर से मांगता हु माफी अजनबी होने के लिऐ मांगता हु माफी माफ कर देना वरना ये लब्जभी खफा हो जायेंगे मुजसे

खुबसुरती

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इस खुबसुरती की पुजा करु या महोब्बत करु या लिखु कोई ग़ज़ल समझ मे नही आ रहा क्या करु पागल सा हो गया हु गमजदा दिल मे अभी तो जान आयी है अभी तो इस रुह ने नया जन्म लिया है अभी तो अश्को ने रुख बदला है बादलोंने अभी तो काला रंग लिया है इस मोसमने मुझेभी नया आशिक बनाया है तो फिर कोई तो कहो इन्ह पलकोंसे की ना मिटे वक्त से की थम जाये मुझे देखना है इसे मरते दम तक ओ खफा होने तक उसका खफा होना और मेरा मर जाना एकही तो बात है अब तो सहमी हुई धडकनों कोभी है उम्मिद उसके आने की मेरी तखईल कोभी है आस उसको पाने की मेरी तहरिर का इब्तिदाभी वो इन्तेहा भी वो फिरभी मै हु खामोश इस खामोशी के लिऐ, इस बेवफाई के लिऐ पुरी कायनात गा रही है बैन अब आंख हो रही है नम सुक रहे है ओठ क्योकी उसकेबिना जिंदगी एक खौफनाक मौत

क्रांती

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उनकी सांसे हो रही है यतीम और लोग कह रहे है मजाक है ये उनकी आवाज हो रही है गुमशुदा और लोग कह रहे है मजाक है ये रुह जानती है लढना धडकने समजते है खत्म होना फिरभी तुटती जमुरियत के वजिर-ए-आलम हरा देते है उनको हर पल हर दम इनके यहा रोने की गुनगुनाहट जनाजा भेजती है खुले बाजार मे और अब तो कफनभी महेंगा हुआ है जान से गुंज रही है सिर्फ घायालों की पुकार मुर्दाघर बन गया है हर एक मकान तो फिर जान को तो जानाही है एक दिन तो फिर क्रांती तो होगीही, खुन तो बहेगाही, गोली तो छुटेगीही फिर चाहे निशाने पे हो इनका सिना या कलंकितों का जिना मरना तो हैही लेकिन अब आसुओं के बिना

परींदे

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ये परींदे उड जा खुले आसमान मे बेजुबान होंगी खामोशीया कफनभी होगा महेंगा पर सीने मे सिर्फ तेरीही जान होगी... मै तो किंकर हु जालीम अंजुमन का शौकिन हु लज़्ज़त-ए-गिरिया का ताबिर के मेहबुब का दिवाना हु पर सच मे तो कोई मरासिम नही मेरा अकेलाही इम्कान करता हु किसी के होने का... अब तुजमेही है शम्मे की आखरी उम्मिदे रंजिश लेके बैठी है वो मुजसे मेहबुब तो बची है सिर्फ आखों मे खफा हो गयी थी ओ अब हो गयी गुमशुदा तलाश तो अभीभी करता हु लहु को तोड मरोड के फिरभी जिंदा हु मरता हु तभी जब आते है याद उसके कातिल खंदा-ए-लब... मै तो गम के अंधेरे मे डुबा बद्नशिब तु तो बेवफा खुले आसमान का सिकंदर प्यार की रोशनी तिलक लगती है मस्तिष्क पे और मेरा शिर कब का कट गया मैदान-ए-जंग मे अब जिंदा हो के भी मुर्दा बन गया हु... अभी तु मेरी भी उम्मिद बन गया है ..... किंकर – slave अंजुमन – society लज़्ज़त-ए-गिरिया - taste of tears ताबिर – meaning of dreams मरासिम – relationship इम्कान – possibilities रंजिश - enmity खफा – angry खंदा-ए-लब – smiling lips बेवफा – errant