पोस्ट्स

भेट तुकोबाची

इमेज
वैकुठवासी एक । भेटला मज वाट धरली आम्ही । पंढरीची त्याचे भलतेच साहस । म्हणे उजेड शोध मला रात्रीची साथ । तिमिरासाठी तो सांभाळे भार । स्वत:चाच स्वत: मी वाहतो भोग । चंद्रभागेत त्याचा त्यावर रोष । विटेचा सुटेना मोह मी असा शांत । माझा लोभ देहावरी त्याचा हा हट्टाहास । गोड व्हावा शेवट मी करतो आभास । सुख-दु:खांचा मी म्हणे तुकोबा। हाच का मोक्ष आता बुडवी गाथा । मोक्षासाठी तुका म्हणे विवेक । बस झाला खेळ मी करतो सुरवात । नव्या खेळाची

मै खाली किताब बन जाता हु

इमेज
जहा घर था मेरा वहा शाम आती है सुबह सुबह शाम होते ही चली जाती है मै घर की चौकट बन जाता हु कल तक खुरदरी थी जमिन, सुना है वहा नदी बहती है खत लिखने का जमाना गुजर गया मै अभी भी कलम ढुंढ रहा हु पता नही किस रास्ते पर हु पता नही हातों की लकिर है की राह कोई लकिरे नींदसी गहरी है, मै तकिया बन जाता हु, बादल छूते  है पहाड या पहाड निगल जाता है आसमान बुंदे बरसती है राहो में मैं बहता लावा बन जाता हु रोशनी पत्तोंपर कुछ लिहिती है और मिठ्ठी जमिनपर जिंदगी रंगीन स्याही है मै खाली किताब बन जाता हु हर रोज मै मिलता हु मेरे जैसे किसी अंजान से ओ मुस्कुराते हुए दुर जाता है मै कल के सोच मे डुब जाता हु

हम बेकार हो गये

इमेज
मौत से हम खफा थे, पर तुम्हारे प्यार मे हम उसीसे इश्क कर बैठे जल रहा था आसमान दिल का तुम्हारे नाम से, हम सिर्फ धुऑ देखते रह गये हमारे दर्द की बद्बू ऐसी थी की लोग दुर चले गये हम यही खुशबू सूंघते रह गये जब आग लगी थी इस शहर मे तुम ज्वाला बनकर आकाश मे मिल गये हम राख हो कर यही बस गये काम की थी जिंदगी, हम भी काम के थे तुम्हने दिल क्या तोडा जिंदगी आवारा, हम बेकार हो गये आनेवाले पल के साथ तुम चले गये अगली मंजिल पर हम गुजरते हुये वक़्त के साथ पिछेही रह गये आधी अधुरी कहाणी पढकर तुम्हने किताब बंद कर दी हम तो शायरी लिखतेही रह गये

तुम ही बताओ

इमेज
घाव गहरा है कोनसी दवा दू वार तुम्हारा था कोनसी सजा दू दिल का घर था मेरे दिल मे तुम्हने चुराया अब कोनसा पता दू आसमान खत्म हुआ है यहा तुमसे मिलने कितने पहाड मिटा दू आखे मुन्नवर इतनी सुबह रुक गयी यहा तो रात है मै कोनसा दिया दू शराबी आखे अब तडपा रही है बची हुई शराब मै कैसे लौटा दू विवेक ही गुनहगार है हम सब का तुम ही बताओ मै कोनसा फैसला दू

भुल गये

इमेज
रास्ते पर रुकना भुल गये यहा आकर रास्ता भुल गये पलके झुककर देखा तुम्हने हम मर जाना भुल गये दो पल साथ क्या चले तुम हम अकेले चलना भुल गये शिशीर मे बिखरते है सब यहा पत्ते झडना भुल गये बादलो ने सुरज को छुपाया सोहबत मे अंधेरा भुल गये आसमॉ मे जुगनू बिखरे है अभी ओ जलना भुल गये मुस्कुराकर चले गये तुम हम याद करना भुल गये विवेक इंसान था कुछ पल अब हम जीना भुल गये

कुछ इस तरहा आ जाओ यहा

लहराते हुये बाल गालों को जैसे चुमते है कुछ इस तरहा आ जाओ यहा मेहबुब मेहबुबा को बाहो मे जैसे लेता है कुछ इस तरहा आ जाओ यहा कोरा कागज ‘गुलाबी’ जैसे बनता है कुछ इस तरहा आ जाओ यहा बेमतलबी लब्जों से गझल जैसे बनती है कुछ इस तरहा आ जाओ यहा गिरता हुआ अफ्ताब लहरों को जैसे छुता है कुछ इस तरहा आ जाओ यहा दो सासे एक दुसरे से जैसे लिपटती है कुछ इस तरहा आ जाओ यहा सुर्यग्रहण जैसे होता है सुरज भी चांद से जैसे मिलता है कुछ इस तरहा आ जाओ यहा बादल टुटकर जमीन पर जैसे खिलते है कुछ इस तरहा आ जाओ यहा ये रुह कब्र मे जैसे सो जाती है कुछ इस तरहा आ जाओ यहा

यई ओ विठ्ठले

मध्यंतरी विदर्भातील काही गावांच्या अभ्यासाठी मी गेलेलो.. तेव्हा मी जी परिस्थीती बघितली तेव्हा काहीतरी सुचलेल त्यावेळी ज्या ओळी लिहुन ठेवल्या होत्या त्या आता इथे पोस्ट करीत आहे. (सुट्टीचा आणि परिक्षा नसल्याचा हा एक फायदा).. यई ओ विठ्ठले माझे माऊली ये नयनी जीव आणुनी वाट मी पाहे धरणीच्या ह्या भेगा शोधी तुझे रुप कोरड्या पोटी करतो विठ्ठलनामाचा जाप पिवळा पितांबर आता गगनी कोपला आसुडवारी करूनी जिव तुझ्या दारी आला खोटोबांचे राज्य आम्हा रस्त्यावर जाळी दलालांचे दास आता कोणी नाही वाली पाहूणी आक्रोश आमचा तू का गप्प झाला कृपादृष्टी शोधे आम्ही तुझीया पंढरीराया