तुम ही बताओ

घाव गहरा है कोनसी दवा दू
वार तुम्हारा था कोनसी सजा दू

दिल का घर था मेरे दिल मे
तुम्हने चुराया अब कोनसा पता दू

आसमान खत्म हुआ है यहा
तुमसे मिलने कितने पहाड मिटा दू


आखे मुन्नवर इतनी सुबह रुक गयी
यहा तो रात है मै कोनसा दिया दू

शराबी आखे अब तडपा रही है
बची हुई शराब मै कैसे लौटा दू

विवेक ही गुनहगार है हम सब का
तुम ही बताओ मै कोनसा फैसला दू

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