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मै समझ सकता हु

ओ स्वर, स्वर नही जो तुम्हारा है लेकीन मै सुन नही सकता ओ बात, बात नही जो तुम्हारी है लेकीन मै समझ नही सकता ओ अक्षर, अक्षर नही जो तुम्हारा है लेकीन मै पढ नही सकता ओ नज़्म, नज़्म नही जो तुम्हारी है लेकीन मै लिख नही सकता ओ वक्त,वक़्त नही जो तुम्हारा है लेकीन मै मेहसूस कर नही सकता ओ सास, सास नही जो तुम्हारी है लेकीन ये दिल पहचान नही सकता ओ चीज, चीज नही जो तुम्हारी है लेकीन मै सीनेपर रख नही सकता

भाई दूज

दिवाली मे आसमान भर आया मेरे आंगण मे नीर भर आया हर बेटी घर की रौनक होती है धुंधली है चमक, ये क्या दौर आया रंगीन दिवारे झगमगा रही है दीप्ती नही बस दीप घर आया धुआ धुआ है हर जगह हर वक्त चलते चलते ये कोनसा शहर आया मै आज अकेला खडा था दर पर इस वक्त खाली हाथ मीर आया इतनी दुर कहा गयी है रोशनी सवाल बार बार जिंदगीभर आया

तुम्हारी यादे

तुम्हारी यादे आसमान मे काले बादल लेकर आती है और तुम्हारी राह देखते देखते जो तारे फुल बनकर मुर्जा गये है उन्ह मे जान डालती है तुम्हारी यादे सीने मे सासोंसी बहती है और इस निरस जिस्म को बेबस दिल को, रुह का एहसास दिलाती है तुम्हारी यादे लब्जसी मतलबी है दोनो को बांधकर रखता हु चार दिवारो मे और ये दिवार ऐसी है की आपनेआप टुट जाती है तुम्हारी यादे आती है आईने पर तुम्हारी तस्विर रखकर चली जाती है और मेरी आखे बस मेरा चेहरा ढुंढती रहती है

बस तुमसे इश्क करते है...

आसमान छोटा करके देखो तारे टुटते नही दिल टुटते है... हवा नही चलती हमारी सासे बहती है अंधेरा नही है यहा यहा हम रहते है यहा चांद नही खिलता तुम्हारा चेहरा चमकता है सुबह हसीन नही है कोई शगुफ्ता है यहा सागर नही है किसी के आसु है ये फूल नही तुम्हारी मुस्कान है बारीश नही भिगोती हमे तुम छुती हो... कोयल के सप्तस्वर नही तुम गाती हो... यहा कौन जी रहा है? हम तो बस तुम्हे देखते है... हम मर नही जाते बस तुमसे इश्क करते है...

कुछ चेहरे

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ऐसे ही किसी राह पर मिल जाते है अनगिनत चेहरे कुछ चेहरे साथ चलते है कुछ दुरीया बनाते है हर एक चेहरा अधुरा है हर एक चेहरे मे कमीया है पर ये चेहरे का अधुरापन, ये चेहरे की कमीया कही छुप जाती है एक दुसरे के साये मे जैसे छुप जाते है दाग बादलों के पीछे पलभर का साथ होगा शायद या शायद साथही ना हो हो बस एक अंजान सफर इस अंजान सफर मे भी ये चेहरे बाते करते है खामोशिया भी बाटते है मेरे जैसे कुछ चेहरे यहा भी तन्हा दिखते है कुछ इसी तरहा रंगीन है हर एक चेहरा.. पन्ने पर रंगों को मिलाओ                                                                                            काला रंग बनता है यहा भी अनगिनत रंग है हर एक चेहरे पर लेकिन यहा मिल जाते है रंग तो इंद्रधनुष बनता है.... इंद्रधनुष को मिटना ही होता है हर एक राह को अलग होना ही ...

आजाद राष्ट्र

आजाद हो गये कुछ राष्ट्र कुछ राष्ट्र लोकतांत्रिक हो गये कुछ लोकतांत्रिक हुकुमशाह बन गये और कुछ.. मुहाजिर बन गये..... मासुम थे लोग आजादी का जश्न मना रहे थे असल मे वे आजाद राष्ट्रों के कैदी थे आजाद राष्ट्रोंने मिलकर कुछ पहचाने मिटा दी जिंदा लाश को दो गज जमीन मिल ना पायी कल तक शांत हसमुख थी बौद्ध मुद्रा आज खौफजदा उदास बन गयी

आवाज शांत कर दी गयी।।

और एक आवाज शांत हो गयी गोलीयो कर के शोर मे और एक आवाज शांत हो गयी इस शांती मे जलती मोमबत्तीया डराने लगती है हर एक को है पहचान अपनी अपनी मोमबत्तियां अब उजाला बाटने लगी बाटते बटाते एक दिन अंधेरा हो जाएगा और हम इसी बेबसी के साथ करते रहेंगे सिर्फ इन्तेजार अगली सुबह का कल तुम्हारी मेरी या ऐसेही किसी दूसरे की आवाज शांत की जाएगी धीरे धीरे सब आवाजे शांत की जाएंगी और बचेगी सिर्फ जुबान बिना लब्जों की हम ऐसे 'शांतिप्रिय' समाज में परिवर्तित हो जायेंगे जहा दर्द बयां करना भी होगा एक गुन्हा ऐसे ही किसी शांतिप्रिय समाज के और एक कदम चलने के लिए आज और एक आवाज शांत हो गयी... आज और एक आवाज शांत कर दी गयी।।