पापा

आज अचानक कुछ सुनाई दिया
‘बेटा सो जा
इतनी रात जागना
अच्छा नही होता’
मुझे लगा पापा होंगे
पिठ थपथपाकर
सर पर हात रखकर
थोडी तारीफ करेंगे
लेकीन यहा कोई न था
बस कुछ अखबार थे
और कुछ सफेद पन्ने..
असल मे ये अखबार पढना
पापा ने ही सिखाया
हातों की टुटी लकीरों से
माथेपर लिखनाभी सिखाया

यहा लोग भूल जाते है
अपने चेहरे भी
न जाने पापा के पास
कोनसी दवा है
मै फोन पर बाते बनाता हु
दुनियाभर की
पापा ‘असली बात’ समज जाते है

लोग कहते है
तुम आखों से दिल पढते हो
तुम लिखते बहोत खुब हो
तुम मे ये अच्छा तुम मे ओ अच्छा है
इत्यादी इत्यादी
मै मुस्कुराकर जवाब देता हु
हर एक बच्चा पिता का
आईना होता है

पापा और क्या लिखु मै?
कोनसी वर्णमाला का कोनसा
अक्षर यहा रख दु मै?
पापा ये वर्णमाला तो
आप ही की देन है..






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