मेरी हिर

रात की एक ख्वाईश है
मेरी आंखे बंद करनी है
मेरी पलकों पर लिखना है कुछ

तुम सब का सुरज डुब गया
जिंदा था आतप मेरा भी तेरी नजरों में
तूने इंकार किया
और मै तारिकी के जंगल मे खो गया

अंधेरे को अब कोई सुरत दे दो
इस जंगल को कोई रोशनी दे दो

लेकिन अब वक़्त चला गया
तुझे दूर करके रात का
मक्सद पुरा हो गया

अब मेरी भी आंखे मिट गयी
पर यहा ना दफनाओ मुझे
मेरी हिर का ये शहर नही
तेरा शहर ढुंढ रहे है लोग अभी...

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