बारिश

राधा आ कर नाच रही है
बारिश मे मेरे साथ भिग भी रही है
पर आवाज तो तेरे घुंघरुओं की है
तेरे घुंघरू राधा ने चुराये है या
तुही आयी है राधा बनकर?

बारिश की बुंदों ने
पलकों के पिछे छिपाया है तेरी सुरतसा कुछ
तेरी गालो की लाली उतर गयी है बुंदोंपर
लेकीन बुंदोंने छुपाया है तुझे
या तु आयी है बुंदो को लेकर?

अभी ठंडी हवाओं का छुके जाना
जैसे तेरा बाहों मे आना
शजर की शाखाओं का मुस्कुराना
जैसे तेरी झुलफों का लेहराना
असल मे तुने बारिश लायी है बादलों से मिलकर

तेरे साथ की ये बारिश ऐसे ही बरसने दे
उन्ह बुंदों का अपनापन
दिल की प्यास बुजाता है विरानगी मे भी

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