यूँ ही

हर दिन तुम
यूँ ही आती रहो
रोशनी के बिना सुबह
अच्छी नही दिखती

तुम बिंदिया
यूँ ही लगती रहो
चांद के बिना रात
अच्छी नही दिखती

तुम बाते
यूँ ही करती रहो
धडकनों के बिना नब्ज
अच्छी नही दिखती

तुम ख्वाबो मे
यूँ ही आती रहो
दिल के बिना आह
अच्छी नही दिखती

तुम दुर ही सही
यूँ ही एहसास देती रहो
रुह के बिना जिंदगी
अच्छी नही दिखती

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